प्राइम छत्तीसगढ़ | मुंगेली से खास रिपोर्ट | मुंगेली जिले के लोगों के लिए रेलवे की सुविधाएं पहले ही किसी सपने से कम नहीं थीं। जिले में आज तक रेल लाइन तो नहीं पहुंची सकी, लेकिन कम से कम रेलवे आरक्षण केंद्र के जरिए लोगों को टिकट बुकिंग की सुविधा मिल रही थी। अब आरोप है कि इस इकलौती सुविधा पर भी ताला लटका दिया गया है। सवाल यह है कि आखिर मुंगेली के लोगों को रेलवे की सुविधाओं से कब तक वंचित रखा जाएगा ? क्या मुंगेली की जनता के लिए रेल एक सपना बन कर रह जायेगा ?
आपको बता दे कि वर्ष 2014 में रेलवे टिकट बुकिंग के लिए जिले के मध्य पुराना बस स्टैन में एक रेलवे आरक्षण केंद्र संचालित किया गया था जो जिले का एकमात्र रेलवे आरक्षण केंद्र था जो कि अभी पिछले कुछ सप्ताह से बंद पड़ा है। नतीजा यह है कि हजारों यात्रियों जिनको इस काउंटर से सुविधा मिलती थी उनकी परेशानी अब बढ़ गई है। टिकट बुक कराने के लिए लोगों को करीब 50 किलोमीटर दूर बिलासपुर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं, स्थानीय स्तर पर टिकट एजेंटों के सहारे काम चलाने की मजबूरी के बीच यात्रियों से अच्छी खासी मोटी रकम भी वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
केंद्रीय राज्य मंत्री का गृह जिला, फिर भी सुविधाओं का अकाल!
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुंगेली केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का गृह जिला है। इसके बावजूद जिले के लोगों को रेलवे की बुनियादी यात्री सुविधा के लिए इतनी परेशानी क्यों उठानी पड़ रही है? जब एक जिले में रेल लाइन तक नहीं है, तब रेलवे आरक्षण केंद्र जैसी सीमित सुविधा को भी सुचारू रूप से संचालित नहीं किया जा सकता, तो आखिर आम जनता अपनी समस्याएं लेकर जाए तो कहां जाए ? क्या मुंगेली की जनता सिर्फ चुनाव के समय याद आती है ? क्या जिले की समस्याओं की जिम्मेदारी केवल आम नागरिकों की है ? ये सवाल अब मुंगेली की जनता के बीच उठने लगे हैं।
एक काउंटर बंद, हजारों यात्रियों की परेशानी!
मुंगेली और आसपास के लगभग 100 किलोमीटर के क्षेत्र के यात्रियों को रेलवे आरक्षण केंद्र से सहूलियत मिल रही थी। लेकिन केंद्र बंद होने से यात्रियों को टिकट बुकिंग के लिए अतिरिक्त समय, पैसा और मेहनत खर्च करनी पड़ रही है।
सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं, मरीजों और उन परिवारों को हो रही है, जिन्हें इलाज, नौकरी, पढ़ाई या अन्य जरूरी कामों के लिए दूसरे शहरों की यात्रा करनी पड़ती है।
स्थानीय आरक्षण केंद्र बंद होने के कारण यात्रियों को निजी टिकट एजेंटों पर निर्भर होना पड़ रहा है। आरोप है कि एजेंटों द्वारा टिकट बनवाने के नाम पर भारी रकम वसूली जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब रेलवे की अपनी व्यवस्था मौजूद है, तो आम जनता को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाने की नौबत क्यों आ रही है?
इन सवालों के जवाब जनता जानना चाहती है।
जिला प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ समस्याओं की जानकारी लेना नहीं, बल्कि जनता को राहत दिलाने के लिए संबंधित विभागों से जवाब मांगना भी है।
जनता का सीधा सवाल—रेलवे सुविधा बहाल कब होगी?
मुंगेली की जनता को बड़े-बड़े वादे नहीं, बल्कि छोटी-छोटी जरूरी सुविधाएं चाहिए। जिले में रेल लाइन की मांग लंबे समय से उठती रही है। ऐसे में कम से कम रेलवे आरक्षण केंद्र का नियमित संचालन सुनिश्चित करना तो रेलवे और संबंधित अधिकारियों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
एक तरफ विकास और सुविधाओं की बातें होती हैं, दूसरी तरफ आम नागरिक को टिकट बनवाने के लिए 50 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। यह स्थिति व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अब जरूरत है कि रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें, आरक्षण केंद्र बंद होने का कारण स्पष्ट करें और इसे जल्द से जल्द शुरू कराएं।
मुंगेली की जनता का सवाल साफ है—जब जिले में रेल लाइन नहीं है, तो कम से कम टिकट की सुविधा तो मत छीनिए!


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