मुंगेली । इन दिनों नगर पालिका मुंगेली काफी चर्चे पर है और चर्चे की वजह स्वयं नगर पालिका में चुन कर आए जनप्रतिनिधि है और यही कारण है कि नगर पालिका की कार्यप्रणाली इन दिनों लगातार सवालों के घेरे में है। हाल ही में कांग्रेस कमेटी के कुछ दिग्गजों द्वारा 13 सूत्रीय मांगों को लेकर नगरपालिका सीएमओ होरी सिंह ठाकुर को ज्ञापन सौंपा था। इन मांगों में पीआईसी (प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल) के गठन का मामला भी शामिल था। वही अपना पक्ष रखते हुवे नगर पालिका सीएमओ ने बताया कि पीआईसी गठन से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
पीआईसी गठन नहीं, फिर भी सभापति बने….
नगर पालिका सीएमओ के जवाब से एक सवाल उठता है कि जब नगर पालिका में पीआईसी का गठन हुआ ही नहीं है तो ये सभापति कौन है? ‘सभापति’ लिखी गड़िया शहर में खुलेआम कैसे घूम रही? इस तरीके के गाड़ियों का खुलेआम घूमना कई सवाल खड़े कर रहा है।
आखिर ये सभापति है कौन ?
नगर पालिका के अंदर बिना पीआईसी गठन के सभापति कौन है ? सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पीआईसी गठन का मामला शासन स्तर पर लंबित है, तो नगर में सभापति लिखी गाड़ियां किस आधार पर घूम रही हैं? क्या संबंधित पदों पर विधिवत नियुक्ति या गठन हो चुका है? अगर हो चुका है शासन स्तर क्यों भेजा गया? साथ ही इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही ? और यदि मामला अभी लंबित है, तो सभापति लिखकर वाहन चलाने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है? इन सवालों पर नगरपालिका प्रशासन की स्थिति स्पष्ट होना बेहद जरूरी है।
पूर्व ने हुवे पीआईसी गठन रद्द….
मुंगेली नगरपालिका में नगरीय निकाय चुनाव के बाद से लेकर अब तक में नगरपालिका अध्यक्ष द्वारा दो बार पीआईसी का गठन किया गया था, लेकिन दोनों ही बार आपसी सामंजस्य न होने के कारण पीआईसी को रद्द किया गया। स्थिति यह रही कि कुछ पार्षदों ने पीआईसी में शामिल होने के महज कुछ घंटों बाद ही इस्तीफा दे दिया तो कुछ ने पीआईसी सदस्य बनाने की जानकारी का अभाव बताया।इसके बाद से गठन की प्रक्रिया और उसकी वैधानिक स्थिति को लेकर चर्चाएं होती रही हैं।
क्या मुंगेली की जनता को करना होगा सिर्फ इंतजार ?
मुंगेली की जनता के लिए अब सिर्फ इंतजार ही बच गया है क्योंकि पीआईसी का गठन अब शासन के पास है और शासन से अंतिम निर्णय कब आएगा न कब ? साथ ही क्या नगरपालिका प्रशासन सभापति लिखी गाड़ियों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करेगा? क्या संबंधित वाहनों पर पदनाम लिखने के लिए कोई आधिकारिक आदेश मौजूद है? और यदि नहीं, तो क्या इस मामले में कार्रवाई होगी या नहीं इस पर सब की नजर लगी हुई है।

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