मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से सामने आई तस्वीरों ने इंसानियत, व्यवस्था और गौसंरक्षण के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। नगर पालिका पर मृत गायों को सम्मानजनक अंतिम संस्कार देने के बजाय उन्हें कचरा डंपिंग यार्ड में जानवरों की तरह फेंकने का गंभीर आरोप लगा है।
डंपिंग यार्ड में करीब एक दर्जन गायों के शव सड़ते मिले। हालात इतने भयावह थे कि कचरे में लगी आग से कई शव अधजली हालत में पड़े दिखाई दिए, जबकि पक्षी उन्हें नोचते नजर आए। यह दृश्य इतना वीभत्स था कि मौके पर पहुंचे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। गौसेवकों ने इसे “गौमाता का अपमान” और प्रशासन की “संवेदनहीनता की पराकाष्ठा” बताया है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि गौसंरक्षण और गौसेवा के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली व्यवस्था आखिर जमीन पर इतनी निर्दयी कैसे हो गई? क्या नगर पालिका के लिए मृत गायें सिर्फ कचरा बनकर रह गई हैं?
गौसेवकों का आरोप है कि पहले मृत मवेशियों को नियमों के तहत गड्ढा खोदकर दफनाया जाता था, लेकिन इस बार जिम्मेदारों ने सारी मानवता और नियमों को ताक पर रख दिया। उनका कहना है कि अगर प्रशासन इतना भी नहीं कर सकता कि मृत गौवंश का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कराए, तो फिर गौसेवा के दावे केवल दिखावा हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला मामला है।
वहीं मुख्य नगर पालिका अधिकारी अंकुर पांडेय ने सफाई देते हुए कहा कि सूचना मिलते ही टीम को मौके पर भेजा गया और मृत गायों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया जाएगा। उन्होंने जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है। साथ ही यह आशंका भी जताई कि कहीं नगर पालिका को बदनाम करने के लिए यह साजिशन किया गया मामला तो नहीं।
लेकिन सवाल अब भी वही है…
आखिर गौसंरक्षण के नारों के बीच गौवंश की ऐसी दुर्दशा कब तक होती रहेगी?

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