मुंगेली— देवांगन समाज मुंगेली के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय माता परमेश्वरी महोत्सव के अंतर्गत चल रही परमेश्वरी पुराण कथा के पांचवे दिवस भक्तिभाव और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा। इस अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक चन्द्रपुर निवासी भूपेंद्र ‘छोटू’ देवांगन ने माता परमेश्वरी की पावन गाथा एवं सृष्टि उत्पत्ति की दिव्य कथा का अत्यंत भावपूर्ण और ज्ञानवर्धक वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथावाचक भूपेंद्र छोटू देवांगन ने बताया कि ओंकार से ओंकारिणी, ब्रह्म से ब्रह्मेश्वरी तथा परमपिता परमात्मा से माता परमेश्वरी की उत्पत्ति हुई। उन्होंने विस्तार से समझाया कि माता परमेश्वरी केवल शक्ति का प्रतीक ही नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की जननी हैं, जिनकी कृपा से सृष्टि का निर्माण, संचालन और संरक्षण संभव हुआ। कथा में बताया गया कि माता की लीला क्रमशः आगे बढ़ती गई और उन्होंने नवजीवन की रचना कर संसार को गति प्रदान की। कथावाचक ने सृष्टि के आरंभिक काल का वर्णन करते हुए बताया कि सबसे पहले हिडम्ब नामक गणेश की उत्पत्ति हुई। इसके पश्चात सृष्टि संतुलन हेतु ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्राकट्य हुआ। आगे चलकर माता सरस्वती, माता लक्ष्मी और माता पार्वती की उत्पत्ति का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि ज्ञान, धन और शक्ति के समन्वय से सृष्टि का संचालन संभव हुआ। परमेश्वरी पुराण कथा के दौरान दीपचंद माता हरिणी की उत्पत्ति की कथा भी सुनाई गई, जिसमें माता के तीन दिव्य स्वरूपों — बड़की मंझली, छोटकी माता कमलावती एवं मछली माता इंद्रावती — का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। इन कथाओं के माध्यम से माता की करुणा, ममता और सृजनशीलता को उजागर किया गया। इसके साथ ही कथावाचक ने छोटकी माता अंगारमती की कथा भी श्रद्धालुओं को सुनाई। उन्होंने बताया कि माता अंगारमती की विशेष पूजा फागुन मास में की जाती है और उनकी कृपा से प्रकृति में नवचेतना का संचार होता है। माता अंगारमती के आशीर्वाद से पलाश वृक्ष पर मनमोहक और शुभ मनमोहन पुष्प खिलते हैं, जो प्रकृति की सुंदरता के साथ-साथ शुभता और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। पूरी कथा के दौरान माता परमेश्वरी की महिमा, उनकी दिव्य लीला और सृष्टि के निर्माण में उनकी अहम भूमिका को अत्यंत रोचक एवं भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कथा श्रवण कर श्रद्धालुओं ने इसे न केवल धार्मिक आस्था से जोड़ा, बल्कि इससे आध्यात्मिक ज्ञान और आत्मिक शांति की अनुभूति भी प्राप्त की। महोत्सव में बड़ी संख्या में देवांगन समाज के लोग एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा स्थल पर भक्ति संगीत, जयकारों और माता के गुणगान से वातावरण भक्तिमय बना रहा। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु समुचित व्यवस्था की गई थी। यह जानकारी सोशल मीडिया प्रचारक कोमल देवांगन मुंगेलिहा ने दिया।


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