मुंगेली। जिले में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन नगर पालिका की कार्यप्रणाली इस गंभीर परिस्थिति में भी पूरी तरह सवालों के घेरे में है। ठंड से बचाव के लिए नगर में अब तक एक भी स्थान पर अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है, जो नगर प्रशासन की लापरवाही और असंवेदनशीलता को साफ तौर पर उजागर करता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मुंगेली नगर पालिका मानो जमीनी हकीकत से पूरी तरह कट चुकी है। चौक-चौराहों, बस स्टैंड, बाजार और सार्वजनिक स्थलों पर रात गुजर रहे जरूरतमंद, बुजुर्ग, श्रमिक और राहगीर ठंड से कांप रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्यालयों की गर्म फाइलों में ही उलझे नजर आ रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि नगर पालिका किसी गंभीर हादसे या जनहानि के बाद ही जागने की नीति पर काम कर रही है।
नगर की जनता को राहत देने के लिए चुने गए जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी कम सवालिया नहीं है। न निरीक्षण, न निर्देश और न ही कोई ठोस पहल—यह उदासीन रवैया नगर की संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। हर वर्ष ठंड के मौसम में की जाने वाली बुनियादी व्यवस्थाएं इस बार पूरी तरह नदारद हैं, जिससे नगर पालिका की पूर्व तैयारी और जवाबदेही पर गंभीर संदेह पैदा होता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते अलाव, रैन बसेरे और अन्य राहत इंतजाम नहीं किए गए, तो ठंड से जुड़ी बीमारियों और हादसों का खतरा और बढ़ जाएगा। नगरवासियों ने स्पष्ट शब्दों में प्रशासन से मांग की है कि कागजी योजनाओं से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर तत्काल कार्रवाई की जाए, ताकि नगर पालिका की यह लापरवाही किसी बड़ी त्रासदी में न बदले।

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